{"product_id":"kabir-todne-aur-rachne-ki-samajh-9789356821101","title":"Kabir: Todne aur Rachne ki Samajh","description":"\u003cp\u003e प्रभाकर श्रोत्रिय (19 दिसंबर 1938-15 सितंबर2016)\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e शीर्षस्थानीय आलोचक प्रभाकर श्रोत्रिय के बारे में आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने लिखा था, 'श्रोत्रिय को समीक्षक की उत्कृष्टकोटिक अंतर्दृष्टि निसर्गतः प्राप्त हैं।' और साहित्य की समकालीन पत्रिका 'शिखर' लिखती है, समकालीन आलोचना के क्षेत्र में प्रभाकर श्रोत्रिय संभवतः सबसे अधिक विश्वसनीयता के अधिकारी हैं। विख्यात कवि कथाकार वीरेंद्र कुमार जैन ने 'नवनीत' में लिखा था, 'साहित्य में डूबने की उनकी तन्मय संवेदना बड़ी सूक्ष्म और पंखुरी की तरह महीन है।' डॉ. श्रोत्रिय को केड़िया पुरस्कार देते हुए कहा गया था, 'अपनी मौलिक, अन्वेषणमयी, तटस्थ आलोचना दृष्टि के लिए वे अपनी पीढ़ी के अग्रतम आलोचक के रूप में अखिल भारतीय स्तर पर स्थापित हैं।' उ. प्र. हिंदी संस्थान ने उन्हें आलोचना के लिए आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार देते हुए लिखा कि प्रभाकर श्रोत्रिय भारतीय और पाश्चात्य काव्यशास्त्र के उल्लेखनीय समकालीन विज्ञान आलोचकों में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। अपनी सैद्धांतिक और व्यावहारिक आलोचना-कृतियों के माध्यम से आपने हिंदी आलोचना की भाषा को एक नया संवेग और त्वरा प्रदान की है। आपने आलोचना क\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Prabhakar Shrotriya\u003cbr\u003e\u003cb\u003ePublisher:\u003c\/b\u003e Prabhakar Prakashan\u003cbr\u003e\u003cb\u003ePublished:\u003c\/b\u003e 05\/17\/2023\u003cbr\u003e\u003cb\u003ePages:\u003c\/b\u003e 210\u003cbr\u003e\u003cb\u003eBinding Type:\u003c\/b\u003e Paperback\u003cbr\u003e\u003cb\u003eWeight:\u003c\/b\u003e 0.60lbs\u003cbr\u003e\u003cb\u003eSize:\u003c\/b\u003e 8.50h x 5.50w x 0.48d\u003cbr\u003e\u003cb\u003eISBN:\u003c\/b\u003e 9789356821101\u003cbr\u003e\u003cb\u003eLanguage:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003ci\u003eThis title is not returnable\u003c\/i\u003e\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhakar Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":40971766235251,"sku":"9.78936E+12","price":23.95,"currency_code":"EUR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0555\/9255\/0515\/products\/img_55514322-5df7-44c8-89fe-62ad8051801e.jpg?v=1695739105","url":"https:\/\/bookstorenmore.com\/en-de\/products\/kabir-todne-aur-rachne-ki-samajh-9789356821101","provider":"Bookstore N More","version":"1.0","type":"link"}